Chand Achhut Ank

Chand Achhut Ank (Hardcover)

By Nand Kishore Tiwari 
R 507
R 695
Publisher: Radhakrishna Prakashan
Edition: Hardcover
Language: Hindi
ISBN: 8171193773
EAN: 9788171193776
No. of Pages: 192
Publish Date: 2008-1-1
Binding: Hardcover
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Title: Chand Achhut Ank
Publisher: Radhakrishna Prakashan
Author: Nand Kishore Tiwari
Edition: Hardcover
Language: Hindi
ISBN: 8171193773
EAN: 9788171193776
No. of Pages: 192
Publish Date: 2008-1-1
Binding: Hardcover

Chand Achhut Ank Review

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अध्येताओं के लिए एक उपयोगी पुस्तक। Rating of 5 out of 5 Rating of 5 out of 5 Rating of 5 out of 5 Rating of 5 out of 5 Rating of 5 out of 5
By gunjeshgautam, 2016-12-20 13:58:32.0

समय-समय पर चाँद ने अनेक विशेषांक निकाले। तत्कालीन समय को उसने परिभाषित करने की कोशिश की। उस काल खण्ड के प्रमुख मुद्दे उठाए और उनका विवेचन किया। चाँद के प्रकाशन काल के दौरान स्वाधीनता-आन्दोलन उत्कर्ष पर था। एक ओर गांधीजी का अहिंसक आन्दोलन था, तो दूसरी ओर भूमिगत क्रान्तिकारी थे जो बम और पिस्तौल की बदौलत आज़ादी हासिल करना चाहते थे। चाँद ने राष्ट्रीय आन्दोलन की इन दोनों ही धाराओं का प्रतिनिधित्व किया। गांधीजी के प्रभाव में अगर उसने ‘अछूत अंक’ निकाला तो क्रान्तिकारियों के सम्मान में उसने ‘फाँसी अंक’ संयोजित किया। राष्ट्रीय आन्दोलन के बारे में चाँद की यह समग्र दृष्टि थी। अनेक खंडों में विभक्त इस पत्रिका का सम्पादकीय विचार खंड अत्यन्त सशक्त है। इसकी अनेक टिप्पणियों में अछूत-समस्या के उत्स की विस्तृत पहचान की गई है। इस समस्या के समाधान के रास्ते बताए गए हैं। इस अंक में समाज की विभिन्न अछूत जातियों का तुलनात्मक अध्ययन पहली बार इतनी बारीकी से किया गया है। साहित्यिक उपलब्धियों की दृष्टि से भी यह अंक अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है। प्रेमचन्द की कालजयी कहानी ‘मन्दिर’ इसी अंक में छपी थी। इसकी सामग्री आज भी दलित चेतना को सही दिशा देने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इतिहास और समाजशास्त्र - दोनों ही विधा के अध्येताओं के लिए एक उपयोगी पुस्तक।

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